Sunday, 5 July 2015

मोहब्बत किसी ताज़ की मोहताज़ नही


इक शहंशाह के हसीन ख्वाब की ताबीर देखी है आपनें !
इस मे पेश आये हादसों के मंज़र नही देखें !!
युं तो छोडे है कई दिवानों नें ताज मोहब्बत के वास्ते!!
मोहब्बत किसी ताज़ की मोहताज़ नही होती !!

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