Saturday, 26 April 2014

लव शायरी


नाम उसका मेरे होंटों ने लिया है शायद,

ज़ख्मे दिल फिर से मेरा बूल उठा है शायद ,

काबिले फहम नही सिलसिला नाज़ ओ नियाज़ ,

खुद मोहबत से मोहबत की बिना है शायद ,


धरकने तेज़ हों दिलकी तो महसूस हुआ ,

उसने दिलको की पैघाम दिया है शायद ,

क्या गिला उसकी जफौं का करौं महफिल में ,

नारवा उसकी मोहबत में राव है शायद ,

में रिवायत से बगावत तो नही कर सकती ,

बस मेरी फिकर का अंदाज़ नया है शायद .......

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